fissure
लक्षण, कारण और क्षारसूत्र उपचार
गुदा चिरकाण, जिसे परिकर्तिका कहते हैं, गुदा के आस्तर (Lining) में एक तीव्र वेदना युक्त घाव है। यदि यह चिरकालिक (Chronic) हो जाए, तो यह गंभीर उपद्रव (Sentinel tag, abscess) पैदा कर सकता है। इसे विस्तार से जानें।
What is Parikartika Disorder?
परिकर्तिका विकार क्या है?
यह गुदा त्वचा में एक छोटा घाव है जो मलत्याग के समय या बाद में असहनीय जलन (Daha) और तेज दर्द (Shoola) उत्पन्न करता है। यदि यह पुराना हो जाए, तो यह गुदा मांसपेशी (Sphincter) में ऐंठन (Spasm) और चिरकालिकता लाता है, जिससे जीवन प्रभावित होता है।
(क्या क्षार सूत्र चिकित्सा वास्तव में प्रभावी है?)
- क्षार सूत्र चिकित्सा – चिरकालिक फिशर में आयुर्वेदिक शल्यहै।
- क्षार सूत्र एक सशक्त आयुर्वेदिक पारा-शल्य चिकित्सा है, जो फिशर, भगन्दर और अन्य गुद
- गुद-विकारों के लिए जानी जाती है।
कार्य प्रणाली (क्रिया-तंत्र):
- रोगग्रस्त क्षेत्र में एक विशेष औषधीय (Herbal) सूत्र पिरोया जाता है। यह ऊतकों का छेदन-लेखन (Shodhana-Lekhana) कर दूषित मांस (Infected tissue) को हटाता है और रोपण (Healing) को बढ़ावा देता है। पूर्ण लाभ तक इसे नियमित अंतराल पर बदला जाता है।
फिशर में क्षार सूत्र के लाभ:
- कोई बड़ी शल्य क्रिया (Major Surgery) आवश्यक नही
- अल्प वेदना (Pain) एवं रक्तस्राव (Bleeding)
- तेज रोपण (Healing) और पुनरावृत्ति (Recurrence) की कम संभावना
- स्थानीय संज्ञाहरण (Local Anesthesia) में किया जाता हैा
- स्थानीय संज्ञाहरण (Local Anesthesia) में किया जाता है
मुख्य कारण
- कब्ज़ और कठोर मल
- मल त्याग के समय अत्यधिक ज़ोर लगाना
- लंबे समय तक चलने वाली दस्त की समस्या
- पानी की कमी और कम फाइबर वाला आहार
- गर्भावस्था और प्रसव
क्या आपको सहायता चाहिए?
फिशर के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। प्रारंभिक आयुर्वेदिक इलाज और क्षार सूत्र चिकित्सा की मदद से आप सर्जरी, दर्द और जटिलताओं से बच सकते हैं।
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